
सागर/ 29 मार्च 2026/ सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े द्वारा गत दिवस लोकसभा में बाल परिचर्चा संस्थाओं के आधुनिकीकरण के संबंध में पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि मंत्रालय ने मिशन वात्सल्य पोर्टल का नया संस्करण शुरू किया है। यह पोर्टल बाल संरक्षण सेवाओं से जुड़े सभी हितधारकों के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा।उन्होंने बताया कि यह तकनीकी रूप से उन्नत और सुरक्षित पोर्टल है, जो राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न एजेंसियों को एक साझा डिजिटल मंच प्रदान करता है। इसमें पहले से संचालित ‘खोया-पाया’ और ‘ट्रैक-चाइल्ड’ सेवाओं को भी शामिल किया गया है। पोर्टल के माध्यम से राज्य बाल संरक्षण समिति, राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, विशेष किशोर पुलिस इकाई और बाल देखरेख संस्थाएं एक ही मंच पर कार्य कर सकेंगी।मंत्री ने कहा कि यह पोर्टल कार्यों की पुनरावृत्ति को रोकने के साथ ही विभिन्न एमआईएस डैशबोर्ड के जरिए बेहतर निगरानी, योजना निर्माण और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करेगा। साथ ही, यह बच्चों की केस हिस्ट्री, पुनर्वास उपायों और संस्थागत तथा गैर-संस्थागत देखरेख से जुड़ी सेवाओं की डिजिटल निगरानी को भी आसान बनाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने किशोर न्याय (संशोधन) अधिनियम 2021, आदर्श नियम 2022 और दत्तक ग्रहण विनियम 2022 के तहत दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाया है। किशोर न्याय अधिनियम 2015 के प्रावधानों के अनुसार, 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद संस्थाओं से बाहर आने वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए वित्तीय सहायता देना अनिवार्य किया गया है।इसके अलावा, सरकार देशभर में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, बाल संरक्षण और बाल लैंगिक शोषण की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। ये कार्यक्रम राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के सहयोग से सामुदायिक पहुंच, स्कूल आधारित गतिविधियों और डिजिटल अभियानों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। मिशन वात्सल्य योजना के तहत क्षेत्रीय सम्मेलन और जनजागरूकता कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं।
