
सागर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में 6 वर्षीय प्रकृति तिवारी ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और योग के प्रति समर्पण से सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रकृति ने 95 वर्षीय वरिष्ठ योग गुरु विष्णु आर्य के साथ मंच साझा करते हुए सैकड़ों लोगों को योगाभ्यास कराया और यह संदेश दिया कि योग की शुरुआत किसी भी उम्र में की जा सकती है।प्रकृति पिछले 285 दिनों से लगातार बिना एक भी दिन का विराम लिए योगाभ्यास कर रही है। वह प्रतिदिन न्यूनतम 12 सेट सूर्य नमस्कार (लगभग 144 आसन) तथा लगभग 10 अन्य महत्वपूर्ण योगासनों का अभ्यास करती है। उसका व्यक्तिगत रिकॉर्ड लगातार 45 सेट सूर्य नमस्कार (लगभग 540 आसन) करने का है। कई अवसरों पर उसने 30, 40 और 45 सेट तक सूर्य नमस्कार कर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन का परिचय दिया है।यद्यपि प्रकृति लगभग दो वर्षों से योग से जुड़ी हुई है, लेकिन प्रारंभिक अवधि में उसका अभ्यास कभी-कभी ही होता था। पिछले लगभग 10 महीनों (285 दिनों) से वह बिना एक भी दिन का विराम लिए लगातार योगाभ्यास कर रही है। नियमित योग के कारण उसका ऊर्जा स्तर अत्यंत उत्कृष्ट बना हुआ है। इसका सकारात्मक प्रभाव उसकी पढ़ाई पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।


विद्यालय में उसकी 100 प्रतिशत उपस्थिति रही है तथा उसे बेस्ट अटेंडेंस का सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। इतनी कम आयु में योग, अनुशासन और शिक्षा के बीच संतुलन बनाना वास्तव में प्रेरणादायक और प्रशंसनीय है।आज के समय में जब अधिकांश बच्चे मोबाइल, जंक फूड और स्क्रीन की आदतों से प्रभावित हो रहे हैं, वहीं प्रकृति अनुशासित दिनचर्या, नियमित योग और स्वस्थ जीवनशैली का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। वह जंक फूड, बिस्किट, कुरकुरे, टॉफी, नमकीन आदि से दूर रहती है तथा मोबाइल स्क्रीन का उपयोग भी नहीं करती।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने प्रकृति के आत्मविश्वास, ऊर्जा और योग के प्रति समर्पण की सराहना की। वरिष्ठ योग गुरु विष्णु आर्य ने भी उसकी निरंतरता और अनुशासन को आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।प्रकृति के पिता महेश तिवारी स्वयं योग प्रशिक्षक हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने जिला प्रशासन एवं कलेक्टर के निर्देशन में कोविड सेंटरों में जाकर मरीजों को योग एवं प्राणायाम का प्रशिक्षण दिया। उनकी पत्नी साक्षी तिवारी भी कोविड संक्रमण के दौरान गंभीर रूप से प्रभावित हुई थीं और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी थी। उस कठिन समय में नियमित प्राणायाम, योगाभ्यास, चिकित्सकीय उपचार और सकारात्मक मनोबल के सहयोग से उन्होंने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। यह अनुभव समाज के सामने योग और प्राणायाम की उपयोगिता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा। इस संबंध में प्रकाशित समाचारों और जनजागरूकता प्रयासों को जिला प्रशासन द्वारा अपने आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं सोशल मीडिया माध्यमों पर भी साझा और सराहा गया था।महेश तिवारी का मानना है कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवन जीने की एक सम्पूर्ण जीवनशैली है। उनका कहना है कि यदि बच्चों को प्रारंभ से ही योग, संतुलित आहार और अच्छे संस्कारों से जोड़ा जाए तो वे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से अधिक सक्षम बन सकते हैं।अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रकृति तिवारी की सहभागिता केवल एक प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि योग की कोई आयु सीमा नहीं होती। 95 वर्षीय वरिष्ठ योग गुरु और 6 वर्षीय बालिका का एक साथ मंच पर योग सिखाना पीढ़ियों को जोड़ने वाला प्रेरक दृश्य बन गया। प्रकृति का सपना है कि योग के माध्यम से सागर को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जाए तथा अधिक से अधिक लोगों को स्वस्थ, सकारात्मक और अनुशासित जीवन के लिए प्रेरित किया जाए।— विशेष संवाददाताअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस विशेष 🌿🧘♀️🇮🇳
