
TET परीक्षा की अनिवार्यता के विरुद्ध माननीय उच्चतम न्यायालय में ‘रिव्यू पिटीशन’ दायर करने की मांग।लोक शिक्षण संचालनालय के विवादास्पद पत्र पर रोक लगाने और शिक्षकों को मानसिक प्रताड़ना से बचाने की अपील।सागर | म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ जिला इकाई सागर द्वारा आज माननीय मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश शासन एवं मुख्य सचिव के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिला कलेक्टर सागर को सौंपा गया। यह ज्ञापन प्रदेश के लगभग 3 लाख शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी किए गए एक ‘तर्कहीन’ पत्र के विरोध में दिया गया है।म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश मंत्री राकेश श्रीवास्तव के मार्गदर्शन एवं जिला अध्यक्ष अवधेश कुमार उपाध्याय के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के पत्र (दिनांक 03 मार्च 2023) पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। संघ का कहना है कि उक्त पत्र में माननीय उच्चतम न्यायालय के जिस निर्णय का हवाला दिया गया है, वह अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों से संबंधित है इसे शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों से जोड़कर देखना अधिकारियों की बड़ी भूल है।संघ ने स्पष्ट किया कि RTE Act 2009 में लागू हुआ, जबकि प्रदेश में हजारों शिक्षक 2009 से पूर्व की सेवा-शर्तों और नियमों (मिनी PSC, मेरिट, साक्षात्कार) के तहत नियुक्त हुए हैं। किसी भी कर्मचारी की सेवा-शर्तों को नियुक्ति के बाद भूतलक्षी प्रभाव से बदलकर उन्हें हानि पहुँचाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। ज्ञापन में सवाल उठाया गया है कि जो निर्णय माननीय उच्चतम न्यायालय ने 01.09.2025 को दिया, उसका संदर्भ विभाग के पत्रों में वर्षों पहले से कैसे दिखाई दे रहा है? क्या विभाग के पास भविष्य देखने की शक्ति है या यह प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है?संघ ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस विषय में पुनरीक्षण याचिका (Review Petition) दायर कर दी है और जम्मू-कश्मीर सरकार भी इसकी समीक्षा कर रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री महोदय से आग्रह है कि प्रदेश के शिक्षकों के हित में सुप्रीम कोर्ट रिव्यू पिटीशन लगाकर न्याय दिलाया जाए।संघ का आरोप है कि DPI ने यह पत्र जारी करने से पहले राज्य मंत्रिमंडल या स्कूल शिक्षा सचिवालय से अनिवार्य वैधानिक परामर्श या लिखित अनुमोदन प्राप्त नहीं किया है, जो शासन की नीति का उल्लंघन है।आंदोलन की चेतावनी मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश मंत्री राकेश श्रीवास्तव ने कहा, “प्रदेश का शिक्षक संवर्ग इस समय भय और रोष के माहौल में है। यदि सरकार ने तत्काल इस पत्र पर रोक नहीं लगाई और माननीय उच्चतम न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दायर नहीं की, तो म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ अपने शिक्षकों के हक की लड़ाई के लिए स्वयं माननीय उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने को बाध्य होगा।”इस अवसर पर संघ के पदाधिकारियों ने एक स्वर में मांग की है कि 25-30 वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों को इस प्रकार की परीक्षाओं के जाल में उलझाना उनके सम्मान और करियर के साथ खिलवाड़ है।इस अवसर पर भारी संख्या में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारी कार्यकर्ता एवं मातृशक्ति उपस्थित रही।अवधेश कुमार उपाध्याय जिला अध्यक्ष मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ जिला सागरमो.नम्बर-8770688528
