
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस समय केवल एक ही वीडियो की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। चिन्मय मिशन के एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर कुछ ऐसा नजारा दिखा जिसने सबको हैरान कर दिया। कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वॉयस क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल करके साल 1993 में ब्रह्मलीन हुए आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानंद का एक डिजिटल अवतार तैयार किया गया था। इस स्क्रीन पर दिख रहे एआई अवतार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बातचीत करते नजर आए।
जैसे ही इस संवाद का वीडियो इंटरनेट पर सामने आया, लोगों की प्रतिक्रियाओं का ऐसा तूफान उठा कि सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया।
सोशल मीडिया पर खिंचाई और विपक्ष का तीखा हमला
इस वीडियो के वायरल होते ही विपक्ष और आलोचकों ने इसे आड़े हाथों ले लिया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह के मीम्स शेयर किए जा रहे हैं और लोग इसे “भयंकर मजाक” करार दे रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि तकनीक का इस्तेमाल आध्यात्मिक श्रद्धा जगाने के लिए नहीं, बल्कि केवल प्रचार और अपनी तारीफ करवाने के एक नए हथकंडे के रूप में किया जा रहा है। कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि दिवंगत संतों के नाम पर इस तरह का तकनीकी स्वांग रचना कितना जायज है?
समर्थकों का जवाब: विज्ञान और अध्यात्म का अनूठा संगम
दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री के समर्थकों और इस कार्यक्रम के आयोजकों का नजरिया बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि यह आधुनिक विज्ञान की ताकत है, जिसके जरिए युवा पीढ़ी को अपने पुराने गुरुओं के विचारों और उनकी आवाज से दोबारा जोड़ा जा सका है। समर्थकों के मुताबिक, इस तकनीक की आलोचना करने वाले आधुनिक बदलावों को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
| विवाद का मुद्दा | विपक्ष और ट्रोलर्स का पक्ष | समर्थकों और आयोजकों का पक्ष |
|---|---|---|
| तकनीक का इस्तेमाल | इसे एक राजनीतिक तमाशा और पब्लिसिटी स्टंट बता रहे हैं। | इसे विज्ञान और अध्यात्म का एक सकारात्मक जुड़ाव मान रहे हैं। |
| जनता की प्रतिक्रिया | मीम्स और चुटकुलों के जरिए इस पूरे दृश्य का मजाक उड़ाया जा रहा है। | नई पीढ़ी के लिए इसे एक प्रेरणादायक और ऐतिहासिक पल कहा जा रहा है। |
