
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने श्रद्धा एवं भक्तिभाव से मनाया महर्षि वाल्मीकि का प्राकट्य दिवस

महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना की आधारशिला : मधुकर जाटव
सागर। आदिकवि महर्षि वाल्मीकि का जीवन भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता एवं मानवीय मूल्यों का अनुपम उदाहरण है। उनके द्वारा रचित महाकाव्य रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, त्याग, मर्यादा और आदर्श जीवन का शाश्वत मार्गदर्शन है।भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा जिला सागर द्वारा भगवान महर्षि वाल्मीकि का पावन प्राकट्य दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। सागर विधानसभा क्षेत्र के शास्त्री वार्ड स्थित सिद्ध शक्तिपीठ जय माँ हरसिद्धि माँ ललिता धाम परिसर में विराजमान भगवान वाल्मीकि के मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण एवं विधिवत आरती-पूजन के साथ हुआ। इसके उपरांत महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन, उनके साहित्यिक योगदान एवं सामाजिक समरसता के संदेश पर केंद्रित विचार गोष्ठी आयोजित की गई।भगवान वाल्मीकि का जीवन संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणापुंज : अमित कछवाहाकार्यक्रम में अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित कछवाहा ने कहा कि भगवान महर्षि वाल्मीकि भारतीय ज्ञान परंपरा के ऐसे प्रकाशपुंज हैं, जिनकी अमर कृति रामायण ने संपूर्ण मानवता को धर्म, कर्तव्य, करुणा और मर्यादा का मार्ग दिखाया। उनके विचार किसी एक समाज अथवा वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज की अमूल्य धरोहर हैं। भगवान वाल्मीकि का जीवन हमें सिखाता है कि ज्ञान, सदाचार और सत्कर्म ही मनुष्य की वास्तविक पहचान हैं। उनके आदर्शों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।सामाजिक समरसता ही सशक्त समाज का मूल आधार : मधुकर जाटवअनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष मधुकर जाटव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के महान आदर्श हैं। उन्होंने अपनी कालजयी रचना के माध्यम से समाज को सत्य, न्याय, समानता और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया। उनके विचार आज भी सामाजिक एकता, सद्भाव और समरसता को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं। भारतीय जनता पार्टी सामाजिक समरसता एवं समाज के प्रत्येक वर्ग के सम्मान के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्पकार्यक्रम संयोजक एवं मोर्चा जिला महामंत्री अंकित सनकत ने कहा कि भगवान वाल्मीकि का प्राकट्य दिवस केवल श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके महान आदर्शों को अपने आचरण में उतारने का पावन संकल्प है। समाज में शिक्षा, संस्कार, एकता एवं सद्भाव की भावना को सशक्त बनाना ही उनके प्रति हमारी सच्ची आस्था की अभिव्यक्ति होगी।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने भगवान वाल्मीकि के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने तथा सामाजिक समरसता, सद्भाव एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लिया।कार्यक्रम में इनकी रही गरिमामयी उपस्थितिइस अवसर पर अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित कछवाहा, जिलाध्यक्ष मधुकर जाटव, कार्यक्रम संयोजक एवं जिला महामंत्री अंकित सनकत, जिला उपाध्यक्ष एवं पार्षद निशांत आठिया, जिला कोषाध्यक्ष आशीष पंथी तथा वल्लभनगर वार्ड पार्षद नरेश धानक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।वाल्मीकि समाज की ओर से धाम संस्थापक राकेश सनकत, कुलदीप वाल्मीकि, रज्जन करोसिया, महेश सेठ, कमलेश डागौर, सुदेश सनकत, राजेंद्र सनकत, सुनील घेचरे, मोहित सनकत, आदित्य सनकत, सिद्धांत वाल्मीकि, कृष्ण बंसल, कुलदीप राठौर, उमेश डागौर एवं अमित सनकत सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
