
गंगटोक/नई दिल्ली:
उत्तराखंड के उस अंकिता भंडारी हत्याकांड को कौन भूल सकता है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था? अब उसी केस का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है, और इस बार इसकी तपिश सीधे सिक्किम तक जा पहुँची है। अंकिता केस के कथित ‘VIP एंगल’ को लेकर चल रहे भारी बवाल और विरोध प्रदर्शनों के बीच, पूर्व भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने सिक्किम के 19वें राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली है।
गंगटोक के लोक भवन में सिक्किम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। लेकिन इस शपथ ग्रहण के साथ ही दिल्ली, उत्तराखंड और सिक्किम की सियासत में एक नया भूचाल आ गया है।
दिल्ली और देहरादून में आधी रात को हंगामा
जैसे ही राष्ट्रपति भवन से दुष्यंत गौतम के नाम पर मुहर लगी, दिल्ली से लेकर उत्तराखंड तक लोग सड़कों पर उतर आए। इंसाफ की गुहार लगाते हुए अंकिता भंडारी के लाचार माता-पिता इस कड़कड़ाती ठंड की परवाह किए बिना नई दिल्ली के इंडिया गेट पर आधी रात को धरने पर बैठ गए। पीड़ित परिवार का साथ देने के लिए विपक्ष के कई नेता भी सड़कों पर उतरे।
उधर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी कांग्रेस ने इस नियुक्ति के खिलाफ जबरदस्त उग्र प्रदर्शन और पुतला दहन किया। माहौल इतना गरमा गया कि पुलिस को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत करीब 30 बड़े नेताओं पर एफआईआर (FIR) दर्ज करनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों का साफ़ कहना है कि जब तक सीबीआई इस… केस के ‘वीआईपी लिंक’ की पूरी जांच नहीं कर लेती, तब तक दुष्यंत गौतम को इतनी बड़ी संवैधानिक कुर्सी पर नहीं बैठाया जाना चाहिए।
सिक्किम के युवा और वकील भी भड़के, राष्ट्रपति को भेजी चिट्ठी
बवाल सिर्फ उत्तराखंड या दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। जैसे ही दुष्यंत गौतम सिक्किम पहुँचे, वहाँ के स्थानीय लोगों और छात्र संगठनों ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गंगटोक की सड़कों पर युवाओं ने शांतिपूर्ण मार्च निकाला और ‘गौतम गो बैक’ यानी ‘गौतम वापस जाओ’ के नारे लगाए।
यही नहीं, सिक्किम के वकीलों के सबसे बड़े संगठन ‘सिक्किम बार एसोसिएशन’ ने तो सीधे देश की राष्ट्रपति को एक कड़क चिट्ठी लिख डाली। वकीलों ने अपनी चिट्ठी में एक बड़ा कानूनी पेंच फंसाया है। उनका कहना है कि संविधान के नियम (अनुच्छेद 361) के मुताबिक, जैसे ही कोई व्यक्ति राज्यपाल बनता है, उसे हर तरह की आपराधिक जांच और पूछताछ से कानूनी सुरक्षा (इम्युनिटी) मिल जाती है। वकीलों को डर है कि राज्यपाल बनते ही दुष्यंत गौतम से अंकिता केस में पूछताछ करना नामुमकिन हो जाएगा, जिससे सीबीआई की जांच हमेशा के लिए दब सकती है।
आखिर क्या है ये पूरा विवाद और दुष्यंत गौतम की सफाई?
आपको याद दिला दें कि साल 2022 में ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में 19 साल की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले के मुख्य आरोपी और रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य को कोर्ट पहले ही उम्रकैद की सजा सुना चुका है और वह जेल में है।
लेकिन पेंच यह है कि अंकिता ने मरने से पहले अपने कुछ व्हाट्सएप मैसेज में जिक्र किया था कि उस पर किसी ‘वीआईपी’ को स्पेशल सर्विस देने का दबाव बनाया जा रहा है। पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर कुछ कथित ऑडियो और वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद विपक्षी दलों और परिवार ने आरोप लगाया कि वह वीआईपी नाम कोई और नहीं बल्कि दुष्यंत कुमार गौतम ही हैं।
हालांकि, दुष्यंत गौतम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके 47 साल के राजनीतिक जीवन में आज तक कोई दाग नहीं लगा है। उन्होंने वायरल ऑडियो-वीडियो को ‘AI-जनरेटेड’ यानी पूरी तरह नकली (फेक) बताया है और बदनाम करने की साजिश रचने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है।
खैर, भारी विरोध और विवादों के बीच दुष्यंत गौतम ने सिक्किम के राजभवन की कमान तो संभाल ली है, लेकिन अंकिता के परिवार और सिक्किम के युवाओं का गुस्सा देखकर लगता नहीं है कि यह विवाद इतनी जल्दी शांत होने वाला है।
📌 मुख्य बातें (Quick Scan Table)
| कहाँ क्या हुआ? | किसने किया विरोध? | मुख्य मांग / वजह |
|---|---|---|
| दिल्ली (इंडिया गेट) | अंकिता के माता-पिता और विपक्षी दल | राज्यपाल की नियुक्ति तुरंत रद्द हो और निष्पक्ष सीबीआई जांच हो। |
| देहरादून (उत्तराखंड) | कांग्रेस कार्यकर्ता (हरीश रावत पर केस दर्ज) | सरकार के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे और पुतला फूंका। |
| गंगटोक (सिक्किम) | स्थानीय छात्र, युवा और क्षेत्रीय पार्टियां | ‘गो बैक’ के नारे लगाए, कहा- दागी छवि वाले को राज्यपाल न बनाएं। |
| सिक्किम हाई कोर्ट | सिक्किम बार एसोसिएशन (वकील) | राष्ट्रपति से गुहार लगाई कि राज्यपाल बनने के बाद जांच रुक जाएगी। |
