
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा सुधार करते हुए देर रात 23 आईएएस (IAS) अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इस फेरबदल के तहत 11 जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारियों को मंत्रालय में नई और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कुछ जिलों में काम में लापरवाही बरतने वाले कलेक्टरों पर गाज भी गिरी है।किसे मिली कहां की कमान?शासन द्वारा जारी सूची के अनुसार 11 जिलों में नए कलेक्टरों की तैनाती की गई है:• जबलपुर: अरुण कुमार विश्वकर्मा• नर्मदापुरम: आशीष वशिष्ठ• सिंगरौली: अंकित अस्थाना• बालाघाट: आदित्य सिंह• पन्ना: हर्ष सिंह• रायसेन: रोहित सिसोनिया• बुरहानपुर: विवेक कुमार• शाजापुर: डॉ. परिक्षित झाडे• हरदा: कुमार सत्यम• भिंड: पवन कुमार जैन• मऊगंज: राजेश कुमार ओगरे (2012 बैच के आईएएस राजेश कुमार ओगरे को पहली बार जिला कलेक्टर बनाया गया है।)इसके साथ ही राघवेन्द्र सिंह को कृषि विपणन बोर्ड का प्रबंध संचालक और संदीप केरकेट्टा को इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) का सीईओ नियुक्त किया गया है।मंत्रालय में बढ़े कद, रश्मि और सुखवीर को बड़ी जिम्मेदारीसरकार ने बेहतर काम करने वाले अफसरों को अहम मोर्चों पर तैनात किया है। 1994 बैच की आईएएस रश्मि अरुण शमी को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव (ACS) बनाया गया है। उन्हें भोपाल गैस त्रासदी और खाद्य सुरक्षा आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है। वहीं, 1997 बैच के सुखवीर सिंह को मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव और लोक निर्माण विभाग (PWD) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उद्योग विभाग और MSME में भी नए चेहरों को जगह दी गई है, जिसमें कुमार पुरुषोत्तम को पूर्णकालिक MSME आयुक्त नियुक्त किया गया है।इन कप्तानों पर गिरी गाज, हटाने की ये रही वजहइस प्रशासनिक सर्जरी में लापरवाही और शिकायतों के चलते कई कलेक्टरों को हटा दिया गया है:• मूंग आंदोलन में नाकामी: हरदा के कलेक्टर सिद्धार्थ जैन और नर्मदापुरम के कलेक्टर सोमेश मिश्रा को महज 6 महीने में ही हटा दिया गया। किसानों के भोपाल घेराव और मूंग खरीदी आंदोलन के दौरान सही कदम न उठा पाना इसकी वजह माना जा रहा है।• भू-अर्जन विवाद: पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना के जमीन अधिग्रहण विवाद के चलते कलेक्टर ऊषा परमार को हटाकर उद्यानिकी विभाग में भेज दिया गया है।• शिकायतें और निष्क्रियता: सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल को शिकायतों के बाद हटाया गया है। वहीं भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा पर फील्ड का दौरा न करने और जनता से दूरी बनाने के आरोप थे, जिसके चलते उन्हें पद से मुक्त किया गया है।सरकार ने पन्ना में जमीन विवाद को सुलझाने और बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए इस बार अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया है।
