
सागर, 11 सितंबर 2026।स्वच्छ भारत अभियान सागर के नगर निगम ब्रांड एंबेसडर, समाजसेवी एवं प्रकृतिसेवक महेश तिवारी बताते हैं कि आज के समय में बच्चों के स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन के लिए योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उनकी 6 वर्षीय बेटी ने योग के प्रति निरंतरता और अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए 365 दिनों की नॉनस्टॉप योग यात्रा पूरी की है।महेश तिवारी बताते हैं कि इस पूरी यात्रा को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो, लाइव एवं रिकॉर्डिंग के माध्यम से नियमित रूप से दर्ज किया गया, ताकि बच्ची की मेहनत और निरंतरता का रिकॉर्ड सुरक्षित एवं संरक्षित रह सके तथा इसके माध्यम से समाज में योग, स्वास्थ्य, अनुशासन और निरंतर प्रयास के प्रति जनजागरूकता भी आए।पिछले 365 दिनों से बच्ची ने प्रतिदिन नियमित रूप से योगाभ्यास किया। उसका नियम रहा कि वह प्रतिदिन न्यूनतम 12 सेट सूर्य नमस्कार, अर्थात कुल 144 आसनों का अभ्यास करे। इसके साथ ही भुजंगासन, चक्रासन, राजकपोतासन, उष्ट्रासन, हनुमान दंड सहित विभिन्न योगासनों का भी नियमित अभ्यास किया।

बच्ची का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 45 सेट सूर्य नमस्कार अर्थात 540 आसन लगातार, बिना रुके करने का है।रिकॉर्ड नहीं, 365 दिन की निरंतरता सबसे बड़ी उपलब्धिपरिवार के अनुसार इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि कोई रिकॉर्ड नहीं, बल्कि 365 दिनों तक लगातार प्रयास करते रहना और अनुशासन बनाए रखना है।बच्ची करीब दो वर्षों से योग कर रही है, लेकिन पहले योगाभ्यास कभी-कभी ही हो पाता था। पिछले 365 दिनों में योग को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाकर लगातार अभ्यास करना इस यात्रा की सबसे विशेष उपलब्धि रही।योग के साथ बच्ची ने स्वस्थ जीवनशैली और अनुशासन को भी अपनाया। इस दौरान उसकी स्कूल में 100 प्रतिशत उपस्थिति रही। वह स्नैक्स, चिप्स एवं अन्य जंक फूड तथा मोबाइल की आदत से भी दूर रही।योग दिवस के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर दिया योग का संदेशअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बच्ची ने लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर लोगों के बीच जाकर योगाभ्यास कराया। योग दिवस के पूर्व भी विभिन्न स्थानों पर लोगों के बीच योग के प्रति जागरूकता लाने और योगाभ्यास कराने का कार्य किया गया।इसी क्रम में श्री रावतपुरा सरकार फार्मेसी एवं बीएड कॉलेज में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में बच्ची ने 95 वर्षीय योग विशेषज्ञ श्री विष्णु आर्य के साथ मंच साझा किया तथा उपस्थित लोगों के बीच योगाभ्यास कराया।इस दौरान विभिन्न योगासनों के माध्यम से लोगों को नियमित योग एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।बच्ची की योग यात्रा एवं उसके निरंतर प्रयासों की विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ-साथ जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट द्वारा भी सराहना की गई। इससे बच्ची एवं परिवार का उत्साह लगातार बढ़ता रहा।बच्चों के लिए संदेश—कल से थोड़ा बेहतर बनेंमहेश तिवारी का कहना है कि बच्चों को हमेशा किसी से आगे निकलने की दौड़ में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें बस अपने कल से थोड़ा बेहतर बनने का प्रयास करना चाहिए।परिणाम कभी जल्दी मिल सकता है और कभी देर से, लेकिन यदि मेहनत, अनुशासन और निरंतरता बनी रहे तो छोटे-छोटे प्रयास एक दिन बड़ी उपलब्धि में बदल जाते हैं।यह यात्रा किसी को दिखाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने के लिए है।6 वर्ष की छोटी उम्र में बच्ची ने अपने परिवार को भी यह सीख दी है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन सपने और हौसले बड़े हो सकते हैं।परिवार की कामना है कि ईश्वर एवं प्रकृति बच्ची को हमेशा स्वस्थ, सरल और विनम्र बनाए तथा हर बच्चे को अपने जीवन में किसी न किसी अच्छे कार्य के लिए लगातार प्रयास करने की शक्ति दे।महेश तिवारी एवं परिवार ने इस पूरी यात्रा में सहयोग एवं उत्साहवर्धन करने वाले सभी शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त किया है। साथ ही सभी मीडिया साथियों का विशेष धन्यवाद किया है, जिन्होंने बच्ची के 200 एवं 300 दिन पूरे होने पर भी समाचारों में स्थान देकर लगातार उसका उत्साह बढ़ाया।परिवार का सहयोग और भविष्य का लक्ष्यइस पूरी योग यात्रा में पिता महेश तिवारी एवं माता साक्षी तिवारी का निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन बच्ची के साथ रहा। वहीं उसकी 4 वर्षीय छोटी बहन नियति तिवारी भी अपनी दीदी को देखकर योग के प्रति जागरूक हुई है और योगाभ्यास के लिए प्रेरित हो रही है।365 दिनों की इस यात्रा को पूरा करने के बाद बच्ची का लक्ष्य योग के क्षेत्र में निरंतर अभ्यास करते हुए भविष्य में राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नए अभिलेख स्थापित करना है। साथ ही योग के माध्यम से सागर का नाम राज्य, देश और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आगे ले जाने की उसकी इच्छा है।परिवार का कहना है कि यह उपलब्धि किसी अंतिम पड़ाव का नाम नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। आने वाले समय में भी बच्ची योग के प्रति इसी निरंतरता, अनुशासन और समर्पण के साथ आगे बढ़ती रहेगी।
