
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की राजनीति में इस समय भारी सियासी उबाल देखने को मिल रहा है। किसानों की विभिन्न समस्याओं और क्षेत्र के जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा नेता एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने मंगलवार (13 अक्टूबर 2026) को छिंदवाड़ा बस स्टैंड पर एक विशाल आमसभा का आयोजन किया। भाजपा जिला अध्यक्ष की ओर से जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बावजूद सक्सेना के तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने साफ शब्दों में संगठन को चुनौती देते हुए कहा कि वे किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और जनता के हक की लड़ाई जारी रखेंगे। आमसभा के बाद वे अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और सूबे की सरकार के नाम एक प्रशासनिक ज्ञापन सौंपा।’पार्टी चाहे अभी निकाल दे, पर पीछे नहीं हटूंगा’विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अमित सक्सेना ने खुले मंच से हुंकार भरी और कहा, “मैं कोई सर्कस का शेर नहीं हूँ जिसे पिंजरे में डरा कर रखा जाए। मुझे यहाँ की जनता ने चुनकर भेजा है और मैं उनके हक के लिए लड़ता रहूँगा। अगर जनता की आवाज़ उठाने के कारण पार्टी मुझे निष्कासित भी करती है, तो मुझे उसकी कोई परवाह नहीं है। संगठन चाहे तो मुझे अभी बाहर कर दे, लेकिन मैं हमेशा अपनी जनता के साथ खड़ा रहूँगा।”राजनीतिक विश्लेषक अमित सक्सेना के इस आक्रामक बयान को भाजपा संगठन के साथ चल रहे उनके अंदरूनी विवाद और भविष्य के नए राजनीतिक सफर के स्पष्ट संकेत के रूप में देख रहे हैं।सूखे, बिजली-पानी और भारी मुआवजे पर सरकार को घेराजिला पंचायत उपाध्यक्ष ने कलेक्ट्रेट में सौंपे गए अपने मांग पत्र में छिंदवाड़ा जिले को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित करने की पुरजोर मांग उठाई। उन्होंने कहा कि बारिश की बेरुखी के कारण किसान आर्थिक तबाही की कगार पर हैं और सरकार को राहत पैकेज का एलान करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख मांगें भी प्रशासन के सामने रखीं:• चौसरा न्यूक्लियर प्लांट का विरोध: चौसरा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के काम को तुरंत रोकने की मांग की।• चार गुना मुआवजा: परियोजना से प्रभावित हो रहे किसानों की जमीनों का चार गुना उचित मुआवजा देने की बात कही।• पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था: जिले के संकटग्रस्त ग्रामीण इलाकों में नए कुएं और ट्यूबवेल खुदवाकर पानी का संकट दूर करने की मांग उठाई।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का दिया उदाहरणभाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा थमाए गए नोटिस पर तीखा पलटवार करते हुए अमित सक्सेना ने कहा कि वे इस नोटिस का जवाब 13 अक्टूबर के बाद ही देंगे। उन्होंने पार्टी के भीतर उठ रहे अनुशासन के सवालों पर देश के केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देते हुए एक बड़ा सवाल दागा। सक्सेना ने कहा कि जब शिवराज सिंह चौहान स्वयं अपने क्षेत्र के मुद्दों पर प्रदर्शन कर सकते हैं, तो एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वे किसानों की जायज मांगों को लेकर ज्ञापन क्यों नहीं सौंप सकते? उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और अनुशासन की बहस को और तेज कर दिया है।लोकसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए थे सक्सेनाअमित सक्सेना का यह बागी रुख छिंदवाड़ा की स्थानीय राजनीति में कई नई अटकलों को जन्म दे रहा है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान वे कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। अब जब भाजपा संगठन के साथ उनके मतभेद खुलकर सतह पर आ गए हैं, तो राजनीतिक गलियारों में उनकी दोबारा कांग्रेस में घर वापसी की संभावनाओं को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। हालांकि, अभी तक दोनों में से किसी भी दल या स्वयं सक्सेना की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।22 हजार वोटों से जीत का ऐतिहासिक रिकॉर्डअमित सक्सेना छिंदवाड़ा अंचल के एक मजबूत जनाधार वाले नेता माने जाते हैं। उन्होंने जिला पंचायत चुनाव में करीब 22,000 मतों के ऐतिहासिक अंतर से रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी, जो उनके मजबूत व्यक्तिगत प्रभाव को दर्शाती है। अब वही रिकॉर्डधारी जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार और संगठन के खिलाफ मोर्चा खोलकर सड़कों पर उतरा है, जिसने भाजपा आलाकमान के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर दी है। कलेक्ट्रेट से लेकर बस स्टैंड तक के इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबकी निगाहें भाजपा संगठन की अगली कार्रवाई और अमित सक्सेना के अगले सियासी कदम पर टिकी हुई हैं।
