
काल्पनिक छायाचित्र
उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानूनी गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवक प्रमोद कुमार निगम की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी नंदलाल राय उर्फ बबलू राय को एक बड़ी राहत दी है।
कोर्ट ने न सिर्फ उसकी जेल की सजा पर रोक लगाई है, बल्कि उसे जमानत भी मंजूर कर दी है। इसके पीछे की वजह यह है कि नंदलाल राय ने कोर्ट से कहा था कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता है।अदालत ने क्या कहा? (जजों की अहम टिप्पणी) इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण टिप्पणी की। जजों का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई सांसदों और विधायकों (जनप्रतिनिधियों) की सजा पर रोक लगाते हुए यह माना है कि राजनेताओं का अपने मतदाताओं (वोटर्स) के प्रति एक खास कर्तव्य होता है।अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी राजनीतिक व्यक्ति को सजा मिलती है और वह कानूनी तौर पर अपनी उस सजा (दोषसिद्धि) पर रोक नहीं लगवा पाता, तो वह चुनाव लड़ने के अपने मौलिक अधिकार से हमेशा के लिए हाथ धो बैठेगा। कोर्ट ने आगे जोड़ते हुए कहा कि जैसे एक आम आदमी के लिए अपनी आजीविका कमाना उसका अधिकार है, ठीक वैसे ही किसी राजनेता के लिए चुनाव लड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण अधिकार है। इसलिए अपीलकर्ता की सजा पर तब तक रोक लगाई जानी चाहिए, जब तक कि उसकी मुख्य अपील पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।क्या था पूरा मामला और कौन है नंदलाल राय?यह पूरा विवाद राम मंदिर आंदोलन के सक्रिय सदस्य रहे प्रमोद कुमार निगम की हत्या से जुड़ा हुआ है। इस हत्या के आरोप में वाराणसी की एक अदालत ने अप्रैल 2025 में नंदलाल राय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ नंदलाल ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी और अपील के पेंडिंग रहने के दौरान रिहाई की मांग की थी।नंदलाल राय के वकीलों (देवेंद्र देव गुप्ता और पीके सिंह) ने कोर्ट में दलील दी कि उनका मुवक्किल दोषी ठहराए जाने से पहले भाजपा का एक सक्रिय कार्यकर्ता रहा है। अब वह आने वाले 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाना चाहता है—या तो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर, या फिर अगर मौका मिला तो भाजपा की तरफ से। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले में राजनीति के चलते केवल शक और अटकलों के आधार पर उनके मुवक्किल को फंसाया गया है। कोर्ट ने इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अर्जी मंजूर कर ली।मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय मर्डर केस से कनेक्शन प्रमोद निगम हत्याकांड का दोषी नंदलाल राय मूल रूप से गाजीपुर जिले के करीमुद्दीनपुर का रहने वाला है। उसका इतिहास काफी चर्चाओं में रहा है क्योंकि वह 29 नवंबर 2005 को गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में हुए मशहूर भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में एक प्रमुख गवाह बना था।उस हत्याकांड में बाहुबली मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी समेत कई बड़े नाम साजिश रचने के आरोप में नामजद थे। शुरुआत में नंदलाल इस केस में गवाह बना, लेकिन बाद में मुख्तार अंसारी से उसकी नजदीकियां बढ़ने की खबरें आईं और वह अदालत में अपनी गवाही से मुकर गया (होस्टाइल हो गया) था।
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