
सागर। स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में आयोजित “सप्तशक्ति संगम समापन समारोह”आज विद्या भारती सरस्वती शिक्षा परिषद महाकौशल प्रांत जबलपुर द्वारा आयोजित सप्त शक्ति संगम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीमती लवली सोनी (IPS) पुलिस अधीक्षक पुलिस ट्रेनिंग सेंटर सागर अध्यक्षता डॉ श्रीमती प्रतिभा तिवारी अध्यक्ष भारतीय स्त्री शक्ति मंडल म. प्र., मुख्य वक्ता श्रीमती अंजली दुबे जिला कार्यवाहिका राष्ट्र सेविका समिति सागर, प्रो.श्रीमती अर्चना गुप्ता (रीवा)प्रांत संयोजक महाकौशल प्रांत, श्रीमती स्वर्णलता सोनी(बड़ा मलहरा) सह संयोजिका सप्तशक्ति संगम महाकौशल प्रांत, श्रीमती नर्मदिया मरकाम(छिंदवाड़ा) सह संयोजिका सप्तशक्ति संगम महाकौशल प्रांत, श्रीमती मनीषा ठाकुर (जबलपुर) प्रांत सह संयोजिका सप्तशक्ति संगम महाकौशल प्रांत , कार्यक्रम संयोजक श्रीमती ममता सिंह (सागर) हिन्दी विभाग अध्यक्ष, श्रीमती रश्मि अरेले (गौरझामर) जिला संयोजिका एवं सागर जिले की प्रबुद्ध मातृ शक्तियां एवं विभाग समन्वयक राजकुमार ठाकुर सप्त शक्ति संगम विभाग संयोजक वीरेन्द्र जी तिवारी भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का आयोजन विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान एवं सरस्वती शिक्षा परिषद्, महाकौशल प्रांत द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की जिला कार्यवाहिका अंजलि दुबे ने प्रभावपूर्ण एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन दिया। अपने वक्तव्य में अंजली दुबे ने “व्यष्टिसे समष्टि” की अवधारणा को केंद्र में रखते हुए भारतीय नारी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं दार्शनिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। वैदिक काल की ऋषिकाओं, उपनिषद काल की गार्गी, रामायण एवं महाभारत की प्रेरक नारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में नारी को ‘साम्राज्ञी’ का सम्मान प्राप्त था।उन्होंने कहा कि पराधीनता के लंबे कालखंड में अनेक सामाजिक विकृतियाँ अवश्य आईं, किंतु भारतीय संस्कृति का मूल स्वरूप सदैव नारी सम्मान का रहा है। आधुनिकता के इस दौर में महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने संस्कार, परिवार व्यवस्था और कर्तव्यनिष्ठ जीवन मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं एवं मातृशक्ति से आग्रह किया कि वे आत्मगौरव के साथ अपने इतिहास को जानें, परिवार में संवाद बढ़ाएँ और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि स्थायी परिवर्तन कानूनों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के अंतर्मन से प्रारंभ होता है।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभावना एवं सकारात्मक संकल्प के साथ हुआ।
