
ईरान के पवित्र शहर कोम स्थित जामकरन मस्जिद के गुंबद पर लाल झंडा फहराए जाने की खबर ने पूरे मिडिल ईस्ट में हलचल बढ़ा दी है। शिया परंपरा में लाल झंडा प्रतिशोध और अन्यायपूर्ण रक्तपात का प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर यह झंडा तब फहराया जाता है, जब किसी बड़े नेता या निर्दोष व्यक्ति की हत्या के बाद न्याय या बदले की मांग की जाती है।
लाल झंडा क्यों लगाया जाता है?
शिया मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग उस खून का प्रतीक है जो अन्यायपूर्ण तरीके से बहाया गया हो। इसका संबंध इमाम हुसैन की शहादत से भी जोड़ा जाता है। प्राचीन अरब परंपरा में जब किसी कबीले के मुखिया की हत्या हो जाती थी और उसका बदला बाकी होता था, तब उसके घर या कब्र पर लाल झंडा लगाया जाता था। बदला पूरा होने के बाद इसे हटाकर काला या हरा झंडा लगाया जाता था।जामकरन मस्जिद पर लाल झंडा फहराने का संदेश यह माना जाता है कि देश शोक और आक्रोश की स्थिति में है तथा न्याय या प्रतिशोध की भावना प्रबल है।
जामकरन मस्जिद का धार्मिक महत्वकोम की जामकरन मस्जिद शिया मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है। मान्यता है कि इसका संबंध 12वें इमाम, इमाम महदी से है। इस कारण यहां कोई भी प्रतीकात्मक कदम केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक महत्व भी रखता है। मस्जिद के गुंबद पर झंडा फहराना एक शक्तिशाली संदेश के रूप में देखा जाता है।
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है। कई देशों में विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों में बदलाव आ सकता है।-
